Free Bollywood - Indian Mp3


Category - Story

Interesting SMS Story

टीपू सुल्तान की शहादत

टीपू सुल्तान की शहादत
को मेरा सलाम।
हिन्दुस्तान की शान और मैसूरj का शेर ।
इतिहास से मुसलमान शहीदो का नाम
हटाया जा रहा है ।
कोई ऐसा नही जो शहीद टीपू सुल्तान
को ना जानता हो ।
20-11-1750 को इस शेर ने हैदर अली-
फातिमा फख्रुन्निसा के घर मे जन्म
लिया ।
और मात्र 48 साल की उम्र मे 4-5-1799
को बहुत इज्ज़त के साथ एक धोखेबाज़
की गद्दारी से इस दुनिया से
विदा हो गये ।
टीपू पहले इंसान हैं जिन्होने उस ज़माने मे
मिसाइल जैसे हथियार
को बना लिया था ।
टीपू सुल्तान के नाम से
पूरी अंग्रेजी हुकूमत काँपती थी ।
अंग्रेज़ खुद कहते थे कि जब तक टीपू है हम
हिन्दुस्तान को पूरी तरह से गुलाम
नही बना सकते ।
जब अंग्रेज टीपू को मात नही कर पाये
तो उनहोने एक हिन्दू फौजी को खरीद
लिया ।
टीपू हर अपने पर भरोसा करते थे
तो इसी भरोसे के चलते वो अंग्रेजो से
मुकाबला करते रहे ।
आखिर मे उस गद्दार की गद्दारी काम
आई और टीपू रंगा पटनम के मैदान मे
मुकाबला करते हुवे शहीद हो गये,,, मगर
दुशमन को इतनी दहशत थी कि टीपू के
शरीर को चैक करने की भी हिम्मत
नही जुटा पाये ।
आखिर 3 दिन बाद जब टीपू के शहीद
होने की तस्दीक की तब अंग्रेजो के मुँह पर
एक ही बात थी,,, आज हम कामयाब
हो गये, अब हम हिन्दुस्तान
को आसानी से गुलाम बना सकते हैं ।
दोस्तो ये है शहीद टीपू सुल्तान
की मुख्तसर कहानी, वो उलेमा-ए-दीन
थे,,, वली अल्लाह थे,,, नेक-परहेज़गार बंदे थे

आज इतिहास से देश के लिये
मुसलमानो की कुर्बानी को प्लानिंग
के साथ खत्म किया जा रहा है ।
मगर सच सच ही रहेगा ।
जो आप जानते हो वो आने
वाली नस्लो को ज़रुर बताये,,, सिर्फ
एक यही तरीका है कि हम
अपनो का इतिहास अगले अपनो तक
पहुँचाये ।
share the post,


Share On Whatsapp
Interesting SMS Story

एक चिड़िया और चिड़ा की प्रेम कहानी

एक चिड़िया और चिड़ा की प्रेम
कहानी
—————————— ———
एक दिन चिड़िया बोली – मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे ?

चिड़ा ने कहा – उड़
जाऊं तो तुम पकड़ लेना.

चिड़िया-मैं तुम्हें पकड़
तो सकती हूँ,
पर फिर पा तो नहीं सकती!

यह सुन चिड़े की आँखों में आंसू आ गए और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला अब हम
हमेशा साथ रहेंगे,

लेकिन एक दिन जोर से तूफान आया,
चिड़िया उड़ने लगी तभी चिड़ा बोला तुम उड़
जाओ मैं नहीं उड़ सकता !!

चिड़िया- अच्छा अपना ख्याल रखना, कहकर
उड़ गई !

जब तूफान थमा और चिड़िया वापस
आई तो उसने देखा की चिड़ा मर चुका था
और एक डाली पर लिखा था…..
“”काश वो एक बार तो कहती कि मैं तुम्हें
नहीं छोड़ सकती””
तो शायद मैं तूफ़ान आने से
पहले नहीं मरता ।।
“”

दोस्तों अगर आपको यह स्टोरी पसंद आये तोह अपने दोस्तों में शेयर करना मत भूलना “”
ज़िन्दगी के पाँच सच ~
सच नं. 1 -:
माँ के सिवा कोई वफादार नही हो सकता…!!!
────────────────────────
सच नं. 2 -:
गरीब का कोई दोस्त नही हो सकता…!!
────────────────────────
सच नं. 3 -:
आज भी लोग अच्छी सोच को नही,
अच्छी सूरत को तरजीह देते हैं…!!!
────────────────────────
सच नं. 4 -:
इज्जत सिर्फ पैसे की है, इंसान की नही…!!!
────────────────────────
सच न. 5 -:
जिस शख्स को अपना खास समझो….
अधिकतर वही शख्स दुख दर्द देता है…!!!


Share On Whatsapp
Interesting SMS Story

एक बार एक ब्राहमण मर गया

एक बार एक ब्राहमण मर गया,
वो स्वर्ग के वेटिंग लाइन में खडा था
उनके आगे एक काला चश्मा😎 जींस, लेदर जैकेट पहन कर लडका खडा था👞👓👖
धर्म राज लडके से : कौन हो तुम?
लड़का : मैं एक बस ड्राइवर हूँ
धम॔राज : ये लो सोने की शाल और अंदर आ आकर गोल्डन रूम ले लो
धम॔राज ब्राहमण से : कौन हो तुम?
पादरी : मैं ब्राहमण हूँ, और 40 सालो से लोगों को भगवान के बारे में बताया करता था
धम॔राज : ये लो सूती वस्त्र और अंदर आ जाओ
ब्राहमण : भगवान, ये गलत है😕 ये तेज गति से गाड़ी चलाने वाले को सोने की शाल और जिसने पूरा जीवन भगवान का ज्ञान दिया उसे सूती वस्त्र?
धम॔राज : परिणाम मेरे बच्चे परिणाम…
जब तुम ज्ञान देते थे सभी भक्त सोते रहते थे😴😴😴😴
लेकिन जब यह बस तेज गति से चलाता था तब लोग सच्चे मन से भगवान को याद करते थे😀
हमेशा performance देखी जाती है position नही😂😜


Share On Whatsapp
Interesting SMS Story

एक बार एक लड़का

💝एक बार एक लड़का
💝अपने स्कूल की फीस भरने के लिए
💝एक दरवाजे से
💝दूसरे दरवाजे तक
💝कुछ सामान बेचा करता था,

💛एक दिन उसका
💛कोई सामान नहीं बिका
💛और उसे बड़े जोर से
💛भूख भी लग रही थी.
💛उसने तय किया कि
💛अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा,
💛उससे खाना मांग लेगा…

❤पहला दरवाजा खटखटाते ही
❤एक लड़की ने दरवाजा खोला,
❤जिसे देखकर वह घबरा गया
❤और बजाय खाने के उसने
❤पानी का एक गिलास माँगा….

💙लड़की ने भांप लिया था कि
💙वह भूखा है, इसलिए वह
💙एक.. बड़ा गिलास दूध का ले आई.
💙लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया…

💚” कितने पैसे दूं ?”
💚लड़के ने पूछा.
💚” पैसे किस बात के ?”
💚लड़की ने जवाव में कहा.
💚”माँ ने मुझे सिखाया है कि
💚जब भी किसी पर दया करो तो
💚उसके पैसे नहीं लेने चाहिए.”

💘”तो फिर मैं आपको
💘दिल से धन्यवाद देता हूँ.”
💘जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा,
💘उसे न केवल शारीरिक तौर पर
💘शक्ति भी मिल चुकी थी ,
💘बल्कि उसका भगवान् और
💘आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था

💔सालों बाद वह लड़की
💔गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी.
💔लोकल डॉक्टर ने उसे
💔शहर के बड़े अस्पताल में
💔इलाज के लिए भेज दिया…

💜विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को 💜मरीज देखने के लिए बुलाया गया.
💜जैसे ही उसने लड़की के
💜कस्बे का नाम सुना,
💜उसकी आँखों में चमक आ गयी…

💖वह एकदम सीट से उठा
💖और उस लड़की के कमरे में गया.
💖उसने उस लड़की को देखा,
💖एकदम पहचान लिया और
💖तय कर लिया कि वह
💖उसकी जान बचाने के लिए
💖जमीन-आसमान एक कर देगा….

🌹उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी
🌹और उस लड़की कि जान बच गयी.
🌹डॉक्टर ने अस्पताल के
🌹ऑफिस में जा कर उस
🌹लड़की के इलाज का बिल लिया….

🌻उस बिल के कौने में
🌻एक नोट लिखा और
🌻उसे उस लड़की के पास
🌻भिजवा दिया.
🌻लड़की बिल का
🌻लिफाफा देखकर घबरागयी…

💐उसे मालूम था कि
💐वह बीमारी से तो वह बच गयी है
💐लेकिन बिल कि रकम
💐जरूर उसकी जान ले लेगी…

🍀फिर भी उसने धीरे से बिल खोला,
🍀रकम को देखा और फिर
🍀अचानक उसकी नज़र बिल के
🍀कौने में पैन से लिखे नोट पर गयी…

🌸जहाँ लिखा था,
🌸”एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का 🌸भुगतान किया जा चुका है.
🌸” नीचे उस नेक डॉक्टर
🌸होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे.

🌺ख़ुशी और अचम्भे से
🌺उस लड़की के गालों पर आंसू टपक पड़े
🌺उसने ऊपर कि और दोनों हाथ उठा कर
🌺कहा, ” हे भगवान..!
🌺आपका बहुत-बहुत धन्यवाद..
🌺आपका प्यार इंसानों के
🌺दिलों और हाथों के द्वारा
🌺न जाने कहाँ- कहाँ फैल चुका है.”

🌷अगर आप दूसरों पर..
🌷अच्छाई करोगे तो..
🌷आपके साथ भी.. अच्छा ही होगा ..!!

✌अब आपको दो में से
☝एक चुनाव करना है…!
👍या तो आप इसे शेयर करके
✊इस सन्देश को हर जगह पहुंचाएँ..! या

👋अपने आप को समझा लें कि
👎इस कहानी ने आपका दिल नहीं छूआ..!


Share On Whatsapp
Interesting SMS Story

पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी

पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी….“लगता है, बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है,

वर्ना यहाँ कौन आने वाला था… अपने पेट का गड्ढ़ा भरता नहीं, घरवालों का कहाँ से भरोगे ?”

मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने लगा।

पिताजी नल पर हाथ-मुँह धोकर सफ़र की थकान दूर कर रहे थे।

इस बार मेरा हाथ कुछ ज्यादा ही तंग हो गया।

बड़े बेटे का जूता फट चुका है।वह स्कूल जाते वक्त रोज भुनभुनाता है।

पत्नी के इलाज के लिए पूरी दवाइयाँ नहीं खरीदी जा सकीं।

बाबूजी को भी अभी आना था।
घर में बोझिल चुप्पी पसरी हुई थी।
खाना खा चुकने पर
पिताजी ने मुझे पास बैठने का इशारा किया।

मैं शंकित था कि कोई आर्थिक समस्या लेकर आये होंगे….
पिताजी कुर्सी पर उठ कर बैठ गए। एकदम बेफिक्र…!!!

“ सुनो ” कहकर उन्होंने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा।
मैं सांस रोक कर उनके मुँह की ओर देखने लगा।

रोम-रोम कान बनकर
अगला वाक्य सुनने के लिए चौकन्ना था।

वे बोले… “ खेती के काम में घड़ी भर भी फुर्सत नहीं मिलती।इस बखत काम का जोर है।

रात की गाड़ी से
वापस जाऊँगा। तीन महीने से तुम्हारी कोई चिट्ठी तक
नहीं मिली… जब तुम
परेशान होते हो,

तभी ऐसा करते हो।
उन्होंने जेब से सौ-सौ के पचास
नोट निकालकर मेरी तरफ बढ़ा दिए, “रख लो।
तुम्हारे काम आएंगे। धान की फसल अच्छी हो गई थी।

घर में कोई दिक्कत नहीं है तुम बहुत कमजोर लग रहे हो।ढंग से खाया-पिया करो। बहू का भी ध्यान रखो।

मैं कुछ नहीं बोल पाया।
शब्द जैसे मेरे हलक में फंस कर रह गये हों।

मैं कुछ कहता इससे पूर्व ही पिताजी ने प्यार
से डांटा…“ले लो, बहुत बड़े हो गये हो क्या ..?”

“ नहीं तो।” मैंने हाथ बढ़ाया। पिताजी ने नोट मेरी हथेली पर रख दिए।
बरसों पहले पिताजी मुझे स्कूल भेजने
के लिए इसी तरह हथेली पर अठन्नी टिका देते थे,

पर तब
मेरी नज़रें आजकी तरह झुकी नहीं होती थीं।
दोस्तों एक बात हमेशा ध्यान रखे…

माँ बाप अपने बच्चो पर बोझ हो सकते हैं बच्चे उन पर बोझ कभी नही होते है।
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷


Share On Whatsapp
Story

एक छोटी प्यारी बच्ची दुकानदार से बौली

Cute story
😄😄😄
एक छोटी प्यारी बच्ची दुकानदार से बौली –
जब मै बडी हो जाउगी तो आप अपने बेटे की शादी मुझसे करेंगे ?

दुकानदार मुस्कराते हुए बोला-
हाँ जरूर करूँगा…..!!!

बच्ची बोली –
तो अपने होने वाली बहू को डेरी मिल्क दो !
😄😄


Share On Whatsapp
Interesting SMS Story

एक बेटा पढ़-लिख कर बहुत बड़ा

एक बार जरुर पढ़े….! (अच्छी लगे तो शेयर करें)

एक बेटा पढ़-लिख कर बहुत बड़ा आदमी बन गया .
पिता के स्वर्गवास के बाद माँ ने
हर तरह का काम करके उसे इस काबिल बना दिया था.

शादी के बाद पत्नी को माँ से शिकायत रहने लगी के
वो उन के स्टेटस मे फिट नहीं है.
लोगों को बताने मे उन्हें संकोच होता है कि
ये अनपढ़ उनकी सास-माँ है…!

बात बढ़ने पर बेटे ने…एक दिन माँ से कहा..

” माँ ”_मै चाहता हूँ कि मै अब इस काबिल हो गयाहूँ कि कोई
भी क़र्ज़ अदा कर सकता हूँ
मै और तुम दोनों सुखी रहें
इसलिए आज तुम मुझ पर किये गए अब तक के सारे
खर्च सूद और व्याज के साथ मिला कर बता दो .
मै वो अदा कर दूंगा…!

फिर हम अलग-अलग सुखी रहेंगे.
माँ ने सोच कर उत्तर दिया…

“बेटा”_हिसाब ज़रा लम्बा है….सोच कर बताना पडेगा मुझे.
थोडा वक्त चाहिए.

बेटे ने कहा माँ कोई ज़ल्दी नहीं है.
दो-चार दिनों मे बता देना.

रात हुई,सब सो गए,
माँ ने एक लोटे मे पानी लिया और बेटे के कमरे मे आई.
बेटा जहाँ सो रहा था उसके एक ओर पानी डाल दिया.
बेटे ने करवट ले ली.
माँ ने दूसरी ओर भी पानी डाल दिया.
बेटे ने जिस ओर भी करवट ली माँ उसी ओर पानी डालती रही.

तब परेशान होकर बेटा उठ कर खीज कर.
बोला कि माँ ये क्या है ?
मेरे पूरे बिस्तर को पानी-पानी क्यूँ कर डाला..?

माँ बोली….

बेटा….तुने मुझसे पूरी ज़िन्दगी का हिसाब बनानें को कहा था.
मै अभी ये हिसाब लगा रही थी कि मैंने कितनी रातें तेरे बचपन मे
तेरे बिस्तर गीला कर देने से जागते हुए काटीं हैं.
ये तो पहली रात है
ओर तू अभी से घबरा गया ..?

मैंने अभी हिसाब तो शुरू
भी नहीं किया है जिसे तू अदा कर पाए…!

माँ कि इस बात ने बेटे के ह्रदय को झगझोड़ के रख दिया.
फिर वो रात उसने सोचने मे ही गुज़ार दी.
उसे ये अहसास हो गया था कि माँ का
क़र्ज़ आजीवन नहीं उतरा जा सकता.

माँ अगर शीतल छाया है.
पिता बरगद है जिसके नीचे बेटा उन्मुक्त भाव से जीवन बिताता है.
माता अगर अपनी संतान के लिए हर दुःख उठाने को तैयार रहती है.
तो पिता सारे जीवन उन्हें पीता ही रहता है.

हम तो बस उनके किये गए कार्यों को
आगे बढ़ाकर अपने हित मे काम कर रहे हैं.
आखिर हमें भी तो अपने बच्चों से वही चाहिए ना ……..!
1) अगर लगातार दौडने से लक्ष्मी मिलती तो,
आज कुत्ता लक्ष्मीपति होता…..

2) मौत रिश्वत नही लेती लेकिन,
रिश्वत मौत ले लेती है…..

3)काम मेँ ईश्वर का साथ मांगो लेकिन,
ईश्वर काम कर दे ऐसा मत मांगो……

4) कडवा सत्य एक गरीब पेट के लिए सुबह
जल्दी उठकर दोडता है और एक अमीर पेट
कम करने के लिए सुबह जल्दी उठकर
दौडता है..

5) 50 रुपे मेँ 1 लीटर कोल्डंड्रीक आती है..
जिसमे स्वाद और पोषण जीरो.. और
कमाता कौन? मल्टीनेशनल कम्पनिया और
उसके सामने 50 रुपे मे 1 किलो फल आते
है स्वाद भरपुर और पोषण लाजवाब और
कमाता कौन? धुप मेँ,सर्दी मेँ,बरसात मेँ
लारी लेकर घुमता अपना एक गरीब
भारतवासी..

6) सबंध भले थोडा रखो लेकिन,एसा रखो
कि शरम किसी की झेलनी ना पडे मौत
के मुह से जिदंगी बरस पडे और मरने
के बाद शमशान की राख भी रो पडे..

7) जब तालाब भरता है तब,मछलीया
चीटीँयो को खाती है और जब तालाब
खाली होता है तब चीटींया मछलियो
को खाती है, मौका सबको मिलता है
बस अपनी बारी का इन्तजार करो..

8)दुनिया मेँ दो तरह के लोग होते है.. एक
जो दुसरो का नाम याद रखते है और
दुसरा जिसका नाम दुसरे याद रखते है..

9) सुख मेँ सुखी हो तो दु:ख भोगना सिखो
जिसको खबर नही दु:ख की तो सुख
का क्या मजा.?

10) जीवन मेँ कुछ बडा मिल जाए तो छोटे
को मत भुलना.. क्योकिँ जहा सुई काम
हो वहा तलवार काम नही आती..

11) माँ-बाप का दिल दुखाकर आजतक
दुनिया मेँ कोई सुखी नही हुआ..

12) भगवान का उपकार है कि आँसुऔ को रंग
नही दिया वरना रात को भींगा तकिया सवेरे
कुछ ना कुछ भैद खोल देता..

13) जो इंसान प्रेम मेँ निष्फल होता है
वो जिदगी मे सफल होता है..

14) आज करे कल कर कल करे
सो परसो ईतनी भी क्या जल्दी है जब
जीना है बरसो..

15) दुनिया का सबसे कीमती प्रवाही
कौनसा है? आँसु जिसमेँ 1%पानी
और 99% भावनाए होती है..

16) दुनिया का सबसे अमीर आदमी भी
माँ के. बिना गरीब है..

17) गुस्से मे आदमी कभी कभी व्यर्थ बाते
करता है, तो कभी मन की बात भी
बोल देता है..

18) भगवान खडा है तुझे सब कुछ देने के
लिए लेकिन तु चम्मच लेकर खडा है
पुरा सागर माँगने के लिए..

19) आप यह पोस्ट पढ रहे
हो ईसका असतित्व
आप के माँ बाप है…


Share On Whatsapp
Interesting SMS Story

एक बहुत बड़ा सरोवर था।

एक बहुत बड़ा सरोवर था। उसके तट पर मोर
रहता था, और वहीं पास एक
मोरनी भी रहती थी। एक दिन मोर
ने मोरनी से प्रस्ताव रखा कि- “हम
तुम विवाह कर लें,
तो कैसा अच्छा रहे?”
मोरनी ने पूछा- “तुम्हारे मित्र
कितने है ?”
मोर ने कहा उसका कोई मित्र
नहीं है।
तो मोरनी ने विवाह से इनकार कर
दिया।
मोर सोचने लगा सुखपूर्वक रहने के
लिए मित्र बनाना भी आवश्यक है।
उसने एक सिंह से.., एक कछुए से.., और
सिंह के लिए शिकार का पता लगाने
वाली टिटहरी से.., दोस्ती कर लीं।
जब उसने यह समाचार
मोरनी को सुनाया, तो वह तुरंत
विवाह के लिए तैयार हो गई। पेड़ पर
घोंसला बनाया और उसमें अंडे दिए, और
भी कितने ही पक्षी उस पेड़ पर रहते
थे।
एक दिन शिकारी आए। दिन भर
कहीं शिकार न मिला तो वे उसी पेड़
की छाया में ठहर गए और सोचने लगे,
पेड़ पर चढ़कर अंडे- बच्चों से भूख बुझाई
जाए।
मोर दंपत्ति को भारी चिंता हुई,
मोर मित्रों के पास सहायता के लिए
दौड़ा। बस फिर क्या था..,
टिटहरी ने जोर- जोर से
चिल्लाना शुरू किया। सिंह समझ गया,
कोई शिकार है। वह उसी पेड़ के नीचे
चला.., जहाँ शिकारी बैठे थे। इतने में
कछुआ भी पानी से निकलकर बाहर आ
गया।
सिंह से डरकर भागते हुए
शिकारियों ने कछुए को ले चलने
की बात सोची। जैसे ही हाथ
बढ़ाया कछुआ पानी में खिसक गया।
शिकारियों के पैर दलदल में फँस गए।
इतने में सिंह आ पहुँचा और उन्हें ठिकाने
लगा दिया।
मोरनी ने कहा- “मैंने विवाह से पूर्व
मित्रों की संख्या पूछी थी, सो बात
काम की निकली न, यदि मित्र न
होते, तो आज हम सबकी खैर न थी।”
मित्रता सभी रिश्तों में
अनोखा और आदर्श रिश्ता होता है।
और मित्र
किसी भी व्यक्ति की अनमोल
पूँजी होते है।

अगर गिलास दुध से भरा हुआ है तो आप उसमे और दुध नहीं डाल
सकते । लेकिन आप उसमे शक्कर डाले । शक्कर अपनी जगह
बना लेती है और अपना होने का अहसास दिलाती है उसी प्रकार
अच्छे लोग हर किसी के दिल में अपनी जगह बना लेते हैं….
अपन��


Share On Whatsapp
Story

एक बहुत बड़ा सरोवर था। Story

एक बहुत बड़ा सरोवर था। उसके तट पर मोर
रहता था, और वहीं पास एक
मोरनी भी रहती थी। एक दिन मोर
ने मोरनी से प्रस्ताव रखा कि- “हम
तुम विवाह कर लें,
तो कैसा अच्छा रहे?”
मोरनी ने पूछा- “तुम्हारे मित्र
कितने है ?”
मोर ने कहा उसका कोई मित्र
नहीं है।
तो मोरनी ने विवाह से इनकार कर
दिया।
मोर सोचने लगा सुखपूर्वक रहने के
लिए मित्र बनाना भी आवश्यक है।
उसने एक सिंह से.., एक कछुए से.., और
सिंह के लिए शिकार का पता लगाने
वाली टिटहरी से.., दोस्ती कर लीं।
जब उसने यह समाचार
मोरनी को सुनाया, तो वह तुरंत
विवाह के लिए तैयार हो गई। पेड़ पर
घोंसला बनाया और उसमें अंडे दिए, और
भी कितने ही पक्षी उस पेड़ पर रहते
थे।
एक दिन शिकारी आए। दिन भर
कहीं शिकार न मिला तो वे उसी पेड़
की छाया में ठहर गए और सोचने लगे,
पेड़ पर चढ़कर अंडे- बच्चों से भूख बुझाई
जाए।
मोर दंपत्ति को भारी चिंता हुई,
मोर मित्रों के पास सहायता के लिए
दौड़ा। बस फिर क्या था..,
टिटहरी ने जोर- जोर से
चिल्लाना शुरू किया। सिंह समझ गया,
कोई शिकार है। वह उसी पेड़ के नीचे
चला.., जहाँ शिकारी बैठे थे। इतने में
कछुआ भी पानी से निकलकर बाहर आ
गया।
सिंह से डरकर भागते हुए
शिकारियों ने कछुए को ले चलने
की बात सोची। जैसे ही हाथ
बढ़ाया कछुआ पानी में खिसक गया।
शिकारियों के पैर दलदल में फँस गए।
इतने में सिंह आ पहुँचा और उन्हें ठिकाने
लगा दिया।
मोरनी ने कहा- “मैंने विवाह से पूर्व
मित्रों की संख्या पूछी थी, सो बात
काम की निकली न, यदि मित्र न
होते, तो आज हम सबकी खैर न थी।”
मित्रता सभी रिश्तों में
अनोखा और आदर्श रिश्ता होता है।
और मित्र
किसी भी व्यक्ति की अनमोल
पूँजी होते है।

अगर गिलास दुध से भरा हुआ है तो आप उसमे और दुध नहीं डाल
सकते । लेकिन आप उसमे शक्कर डाले । शक्कर अपनी जगह
बना लेती है और अपना होने का अहसास दिलाती है उसी प्रकार
अच्छे लोग हर किसी के दिल में अपनी जगह बना लेते हैं….
अपने प्रिय दोस्तों को फोर्वोर्ड करो मैंने तो कर दिया..ध्यान से पड़ने के लिऎ धन्यवाद और बनाये अच्छे दोस्त


Share On Whatsapp
Story

Vacation Special Kids Story दयालु नन्हीं लड़की

एक समय की बात है कि एक गांव में एक बहुत उदार तथा दयालु नन्हीं लड़की रहती थी। वह थी तो अनाथ, पर ऐसा लगता था जैसे सारा संसार उसी का है। वह सभी से प्रेम करती थी और दूसरे सब भी उसे बहुत चाहते थे।
पर दुख की बात यह थी कि उसके पास रहने के लिए कोई घर नहीं था। एक दिन इस बात से वह इतनी दुखी हुई कि उसने किसी को कुछ बताए बिना ही अपना गांव छोड़ दिया। वह जंगल की ओर चल दी। उसके हाथ में बस एक रोटी का टुकड़ा था।
वह कुछ ही दूर गई थी कि उसने एक बूढ़े आदमी को सड़क के किनारे बैठे देखा। वह बूढ़ा-बीमार-सा लगता था। उसका शरीर हड्डियों का ढांचा मात्र था। अपने लिए स्वयं रोटी कमाना उसके बस का काम नहीं था। इसलिए वह भीख मांग रहा था।
उसने आशा से लड़की की ओर देखा।
‘‘ओ प्यारी नन्हीं बिटिया ! मैं एक बूढ़ा आदमी हूं। मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। मेहनत-मजदूरी करने की मेरे शरीर में शक्ति नहीं, तीन दिन से मैंने कुछ नहीं खाया है। मुझ पर दया करो और मुझे कुछ खाने को दो।’’ वह बूढ़ा व्यक्ति गिड़गिड़ाया।

नन्हीं लड़की स्वयं भी भूखी थी। उसने रोटी की टुकड़ा इसलिए बचा रखा था ताकि खूब भूख लगने पर खाए। फिर भी उसे बूढ़े व्यक्ति पर दया आ गई। उसने अपना रोटी का टुकड़ा बूढ़े को खाने के लिए दे दिया।
वह बोली-‘‘बाबा, मेरे पास बस यह रोटी का टुकड़ा है। इसे ले लो, काश ! मेरे पास और कुछ होता।’’
इतना कहकर और रोटी का टुकड़ा देकर व आगे चल पड़ी। उसने मुड़कर भी नहीं देखा।
वह कुछ ही दूर और आगे गई थी कि उसे एक बालक नजर आया, जो ठंड के मारे कांप रहा था। उदार और दयालु तो वह थी ही, उस ठिठुरते बालक के पास जाकर बोली-‘‘भैया, तुम तो ठंड से मर जाओगे। मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर सकती हूँ ?’’

बालक ने दयनीय नजरों से नन्हीं लड़की की ओर देखा-
‘‘हां दीदी ! यहां ठंड बहुत है। सिर छुपाने के लिए घर भी नहीं है मेरे पास। क्या करूं ? तुम्हारी बहुत कृपा होगी यदि तुम मुझे कुछ सिर ढंकने के लिए दे दो।’’ छोटा बालक कांपता हुआ बोला।
नन्हीं लड़की मुस्कुराई और उसने अपने टोपी (हैट) उतारकर बालक के सिर पर पहना दी। बालक को काफी राहत मिली।
‘‘भगवान करे, सबको तुम्हारे जैसी दीदी मिले। तुम बहुत उदार व कृपालु हो।’’ बालक ने आभार प्रकट करते हुए कहा, ‘‘ईश्वर तुम्हारा भला करे।’’
लड़की मुंह से कुछ बोली नहीं। केवल बालक की ओर प्यार से मीठी-सी मुस्कराहट के साथ देखकर आगे बढ़ गई।
वह सिर झुकाकर कुछ सोचती चलती रही।

आगे जंगल में नन्हीं लड़की को एक बालिका ठंड से कंपकंपाती हुई मिली, जैसे भाग्य उसकी परीक्षा लेने पर तुला था। उस छोटी-सी बालिका के शरीर पर केवल एक पतली-सी बनियान थी। बालिका की दयनीय दशा देखकर नन्हीं लड़की ने अपना स्कर्ट उतार कर उसे पहना दिया और ढांढस बंधाया-‘‘बहना, हिम्मत मत हारो। भगवान तुम्हारी रक्षा करेगा।’’
अब नन्हीं लड़की ने तन पर केवल स्वेटर रह गया था। वह स्वयं ठंड के मारे कांपने लगी। परंतु उसके मन में संतोष था कि उसने एक ही दिन में इतने सारे दुखियों की सहायता की थी। वह आगे चलती गई। उसके मन में कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं था कि उसे कहां जाना है।
अंधेरा घिरने लगा था। चांद बादलों के पीछे से लुका-छिपी का खेल खेल रहा था। साफ-साफ दिखाई देना भी अब बंद हो रहा था। परंतु नन्हीं लड़की ने अंधेरे की परवाह किए बिना ही अनजानी मंजिल की ओर चलना जारी रखा।
एकाएक सिसकियों की आवाज उसके कानों में पड़ी। ‘यह कौन हो सकता है ?’ वह स्वयं से बड़बड़ाई। उसने रुककर चारों ओर आंखें फाड़कर देखा।

‘‘ओह ! एक नन्हा बच्चा !’’ नन्हीं लड़की को एक बड़े पेड़ के पास एक छोटे से नंगे बच्चे की आकृति नजर आ गई थी। वह उस आकृति के निकट पहुंची और पूछा-‘‘नन्हें भैया, तुम क्यों रोते हो ? ओह हां, तुम्हारे तन पर तो कोई कपड़ा ही नहीं है। हे भगवान, इस बच्चे पर दया करो। यह कैसा अन्याय है कि एक इतना छोटा बच्चा इस सर्दी में नंगा ठंड से जम रहा है !’’ उसका गला रुंध गया था।
नन्हें बच्चे ने कांपते और सिसकते हुए कहा-‘‘द-दीदी, ब…बहुत कड़ाके की सर्दी है। मुझ पर दया करो। कुछ मदद करो।’’’‘‘हां-हां, नन्हे भैया। मैं अपना स्वेटर उतारकर तुम्हें दे रही हूं। बस यही कपड़ा है मेरे पास। लेकिन तुम्हें इसकी मुझसे अधिक जरूरत है।’’ ऐसा कहते हुए नन्हीं लड़की ने स्वेटर छोटे बच्चे को पहना दिया।
अब उसके पास तन पर कपड़े के नाम पर एक धागा भी नहीं रह गया था।
वह रुकी नहीं। चलती रही। इसी प्रकार चलते-चलते वह जंगल में एक खुली जगह जा पहुंची। वहां से आकाश दीख रहा था और दीख रहे थे बादलों से लुका-छिपी खेलता चांद तथा टिम-टिम करते तारे।
अब सर्दी बढ़ गई थी और ठंड असहनीय हो गई थी। नन्हीं लड़की का शरीर बुरी तरह कांपने लगा था और दांत किटकिटा रहे थे।

उसने सिर उठाकर आकाश की ओर देखा और एक आह भरी। फिर आंखों में छलकते आंसुओं के साथ वह नन्हीं लड़की बोली-‘‘हे प्रभु, मैं नहीं जानती कि कौन-सी शक्ति मुझे यहां खींच लाई है ! मैं यहाँ क्यों आई ! पर मुझे विश्वास हो रहा है कि यदि यहां से मैं तुमसे विनती करूं तो तुम अवश्य मेरी आवाज सुनोगे। मेरे सामने फैली झील, आकाश की ओर उठते ये सुन्दर-सुंदर पेड़ दूर नजर आती बर्फ से ढकी पर्वतों की चोटियां, आकाश का चांद तथा झिलमिलाते सितारे तुम्हें अर्पित मेरी प्रार्थना के साक्षी है।’’ ऐसा कहते हुए वह फफक कर रो पड़ी।
काफी समय बाद वह संयत हुई। उसने फिर प्रार्थना की-‘ईश्वर, क्या मैं जान सकती हूं कि तुमने मेरे माता-पिता क्यों छीन लिए जबकि मुझे उनकी छत्र-छाया की बहुत आवश्यकता थी ? मुझे अनाथ बनाकर तुम्हें क्या मिला ? इस सारे ब्रह्मांड के तुम स्वामी हो, पर मुझे रहने के लिए एक छोटा-सा घर भी नहीं मिला ? क्या यही तुम्हारा न्याय है ?
यही नहीं तुमने मेरे हाथ का वह रोटी का छोटा-सा टुकड़ा भी ले लिया। इस शीत भरी रात में तुम्हारे संसार में इतने सारे छोटे-छोटे बच्चे बेसहारा और बेघर बाहर जंगल में पड़े भूखे नंगे ठिठुर रहे हैं कि मुझे अपने भी एक-एक करके उतारकर उन्हें देने पड़े। परिणामस्वरूप मैं तुम्हारे सामने वस्त्रहीन खड़ी हूं।’
नन्हीं लड़की सांस लेने के लिए रुकी।

कुछ देर पश्चात उसने भर्राए गले से उलाहना दी-‘मैंने कभी तुमसे शिकायत नहीं की। न ही तुम्हें कोसा परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मेरी कोई भावनाएं ही नहीं है या मेरा हृदय पत्थर है। खैर, मेरे माता-पिता की छोड़ो लेकिन…।’
नन्हीं लड़की न जाने कब तक क्या-क्या शिकायत करती रहती यदि ऊपर से एक आवाज ने उसे टोका न होता।
ऊपर से आकाशवाणी हुई-‘‘ओ प्यारी नन्हीं लड़की, मैं तुम्हारा दुख समझता हूं।’’ लड़की ने चौंककर आकाश की ओर निहारा।
आकाशवाणी जारी रही-‘‘…पर क्योंकि तुम मेरी विशेष संतान हो इसलिए मैंने तुम्हें धरती पर विशेष प्रयोजन से भेजा है। ऐसी संतान को कष्ट सहने पड़ते हैं और घोर परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। मुझे तुम पर गर्व है। तुमने सारी परीक्षाएं सफलतापूर्वक पार की हैं। अब तुम सुंदर वस्त्रों से सजी हो, जरा अपने बदन की ओर देखो।’’
नन्हीं लड़की ने अपने बदन को निहारा तो दंग रह गई। सचमुच वह अलौकिक रूप से मनमोहक वस्त्रों से ढकी थी।
अब चौंकाने की बारी भगवान की थी।
चमत्कार पर चमत्कार होने लगे। नन्हीं लड़की के सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से सजे थाल प्रकट हुए। आकाश से घोषणा हुई-‘‘मेरी प्यारी बच्ची, मैं तुम्हारे माता-पिता को रात के भोजन पर तुम्हारे पास भेजूंगा। वे एक पूरी रात तुम्हारे साथ रहेंगे। और हां, मैं वचन देता हूं कि महीने में एक बार जब तुम इस स्थान पर आओगी, तो वे तुम्हारे साथ एक पूरी रात रहेंगे।’’

नन्हीं लड़की की प्रसन्नता का पारावार न रहा। जब उसने अगले ही क्षण अपने माता-पिता को अपने सामने खड़े पाया। उन्होंने अपनी बेटी को उठाकर बारी-बारी से छाती से लगा लिया और खूब चूमा तथा रोए। खुशी के आंसू तीनों की आंखों में झर रहे थे। मां ने अपने हाथों से नन्हीं लड़की को खाना खिलाना आरंभ किया। तीनों ने साथ-साथ भोजन किया। उस रात नन्हीं लड़की सोई नहीं। माता-पिता भी नहीं सोए। उन्हें भी अपनी बिटिया को बहुत कुछ बताना था।
बातों ही बातों में रात कटती रही।
पौ फटने से पहले एक और चमत्कार हुआ।
वे तीनों आकाश और चांद-सितारों को लेटे-लेटे निहारते हुए बातें कर रहे थे। अकस्मात् झिलमिलाते तारे टूट-टूट कर आकाश से नीचे गिरने लगे। हर तारा जो धरती पर आ गिरा एक सोने के टुकड़े में बदल गया।
मां ने मुस्कराकर बेटी की ओर देखा-
‘‘प्यारी-प्यारी बिटिया। पौ फटते ही हमें यहां से जाना होगा। जितने सोने के टुकड़े तुम बटोर सकती हो, बटोर लो। अपने गांव लौटकर अपने लिए एक प्यारा-सा घर बनाना और सुख से रहना। हां, एक बात और..।’’ उसने प्यार से अपनी बेटी को सहलाते हुए कहा-‘‘तुम्हारे नामकरण से पहले ही हमारी मृत्यु हो गई थी। प्रभु की कृपा से अब वह काम हम कर सकते हैं। अब से तुम्हारा नाम ‘मालती’ होगा। अलविदा प्यारी बिटिया। मालती अलविदा।’’ ऐसा कहते हुए नन्हीं लड़की के माता-पिता लुप्त होने लगे।

मालती ने जब तक उत्तर में अलविदा करने के लिए हाथ उठाया, तब तक वे दोनों लुप्त हो चुके थे। फिर भी नन्हीं मालती को यह आसरा तो था ही कि वह कम से कम महीने में एक बार तो अपने माता-पिता से मिल ही सकेगी। वह पूरी रात उनके साथ बिता सकेगी।
वह काफी देर आकाश की ओर ताकती रही।
फिर मालती अपने गांव लौट आई और एक छोटा सुंदर-सा घर बनवाकर उसमें सुख-चैन से रहने लगी।
अब वह दुनिया की और कुछ भी बात भूल जाए परंतु महीने में एक बार जंगल की खुली जगह पर जाकर अपने माता-पिता के साथ नियत समय पर रात बिताना नहीं भूलती।


Share On Whatsapp
Story

Kids Story In Hindi

ye kahani ek nanhi si gudiya ki hai
jo har waqt apne sapno mai khoye rehti thi
jiski duniya sirf sapne the
wo din hota chahe raat bas sapno ke
sagar mai doobi rehti
uske liye sapne hi uske khilone the
aur saheliya bhi uske sapne
sahi mai soche to
sapne hi uski duniya ban chuke the shayad
use pariyo ki kahaniyo par bhi vishwas tha
aur use vishwas tha
ki ek din uske sapne pure karne ke liye bhi
koi pari jarur aayegi,,,,,,
aur ek din aisa aaya……
ek pari jo har kisi ke sapno ko jankar khush hoya karti thi
wo is nanhi si gudiya ke sapno ko
dekhkar hairaan reh gayi,,,,,
ek choti si nanhi si gudiya
aur aise sapne ……..
us pari ko vishwas na hua,,,,,
us pari ne kayi bacho ke sapno ko jana tha
jisme kayi khilone mangte the
koi naye kapde ,to koi mithaiya……..
par is nanhi si gudiya ke sapne
hairan pareshan kar gaye unhe,,,,,,
tab ek din wo us gudiya ke sapne mai aayi
aur bola gudiya rani kya chahti ho tum
kya mai tumhe khilone du ya kapde
ya kuch aur achi cheez,,,,,
tab wo gudiya boli nahi pari rani…
mujhe is duniye se bachalo….
Mai is duniye ke liye nahi bani,,,,,
Ye duniya bahut bekar hai,,,,
Yahan par log dusro ko dukh dekar khush hote hai
Yahan par kisi ki muskurahat kisi ki nafrat hoti hai
Yahan sab apne liye jeete hai
Par mai aisi nahi banna chahti,,,,
mujhe is duniye se darr lagta hai,
mai ek apni alag duniya banana chahti hoon
jahan mai har kisi ko khushiyan de pau
jahan mere wajah se kisi ke chere par udassi na aaye
tab pari rani ne kaha,,,,
ki itni choti si aankhon mai itne bade sapne..
tab gudiya rani ne kaha
ki mai har kisi se pyaar karna chahti hoon,..
har kisi ke dil mai pyaar basana chahti hoon
har kisi ki takleef apni baton se
khatam kar dena chahti hoon
tab pari rani ne kaha,,,,,
ki gudiya rani tune sach kaha
kit tu is duniye ke liye nahi bani,,,,,,
kyunki is duniya mai sab apne liye hi
khushiyan mangte hai
kisi ko paisa chahiye to kisi ko apna ghar
par aaj mai tere sapno se bahut khush hui hoon
mai tujhe teri alag duniya dungi
… pls vote and comments mee.


Share On Whatsapp
Interesting SMS Quotes Story

यही जिंदगी है।

ज़िंदगी के 20 वर्ष हवा की तरह उड़ जाते हैं.

फिर शुरू
होती है नौकरी की खोज . ये नहीं वो , दूर नहीं
पास . ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते , अंत में
एक तय होती है. और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की
शुरूआत होती है.

और हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक , वह बैंक
में जमा होता है और शुरू होता है अकाउंट में जमा होने
वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल.
इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ . ‘वो’ स्थिर होता है.

बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं. इतने में आयु
पच्चीस वर्ष हो जाते हैं.

विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है. एक खुद की या
माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय
विवाह होता है और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो
जाती है.

शादी के पहले 2-3 साल नर्म , गुलाबी , रसीले और
सपनीले गुज़रते हैं .

हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने . पर ये
दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं. और इसी समय शायद बैंक में
कुछ शून्य कम होते हैं. क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती,
घूमनाफिरना , खरीदी होती है.

और फिर धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और
वर्ष भर में पालना झूलने लगता है.
सारा ध्यान अब बच्चे पर केंद्रित हो जाता है. उसका
खाना पीना , उठना बैठना , शु शु पाॅटी , उसके
खिलौने, कपड़े और उसका लाड़ दुलार. समय कैसे
फटाफट निकल जाता है.

इन सब में कब इसका हाथ उसके हाथ से निकल गया,
बातें करना , घूमना फिरना कब बंद हो गया, दोनों
को ही पता नहीं चला ?

इसी तरह उसकी सुबह होती गयी और. बच्चा बड़ा
होता गया. .. वो बच्चे में व्यस्त होती गई और ये अपने
काम में. घर की किस्त , गाड़ी की किस्त और बच्चे
कि ज़िम्मेदारी . उसकी शिक्षा और भविष्य की
सुविधा. और साथ ही बैंक में शून्य बढ़ाने का टेंशन.

उसने पूरी तरह से अपने आप को काम में झोंक दिया.

बच्चे का स्कूल में एॅडमिशन हुआ और वह बड़ा होने लगा
. उसका पूरा समय बच्चे के साथ बीतने लगा.

इतने में वो पैंतीस का हो गया. खूद का घर , गाड़ी
और बैंक में कई सारे शून्य. फिर भी कुछ कमी है, पर वो
क्या है समझ में नहीं आता. इस तरह उसकी चिढ़ चिढ़
बढ़ती जाती है और ये भी उदासीन रहने लगा.

दिन पर दिन बीतते गए , बच्चा बड़ा होता गया और
उसका खुद का एक संसार तैयार हो गया. उसकी
दसवीं आई और चली गयी. तब तक दोनों ही चालीस
के हो गए. बैंक में शून्य बढ़ता ही जा रहा है.

एक नितांत एकांत क्षण में उसे गुज़रे दिन याद आते हैं
और वो मौका देखकर उससे कहता है ‘
अरे ज़रा यहां आओ ,
पास बैठो .
चलो फिर एक बार हाथों में हाथ ले कर बातें करें ,
कहीं घूम के आएं …. उसने अजीब नज़रों से उसको देखा
और कहा ” तुम्हें कभी भी कुछ भी सूझता है . मुझे ढेर
सा काम पड़ा है और तुम्हें बातों की सूझ रही है ” .

कमर में पल्लू खोंस कर वो निकल गई .
और फिर आता है पैंतालीसवां साल , आंखों पर चश्मा
लग गया .बाल अपना काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में
कुछ उलझनें शुरू ही थीं. . . . . बेटा अब काॅलेज में है.

बैंक
में शून्य बढ़ रहे हैं. उसने अपना नाम कीर्तन मंडली में
डाल दिया और . . . .
बेटे का college खत्म हो गया , अपने पैरों पर खड़ा हो
गया. अब उसके पर फूट गये और वो एक दिन परदेस उड़
गया…

अब उसके बालों का काला रंग और कभी कभी
दिमाग भी साथ छोड़ने लगा…. उसे भी चश्मा लग
गया था. अब वो उसे उम्र दराज़ लगने लगी क्योंकि
वो खुद भी बूढ़ा हो रहा था.

पचपन के बाद साठ की ओर बढ़ना शुरू था. बैंक में अब
कितने शून्य हो गए, उसे कुछ खबर नहीं है. बाहर आने
जाने के कार्यक्रम अपने आप बंद होने लगे ।

गोली -दवाइयों का दिन और समय निश्चित होने
लगा . डाॅक्टरों की तारीखें भी तय होने लगीं. बच्चे
बड़े होंगे ये सोचकर लिया गया घर भी अब बोझ लगने
लगा.

बच्चे कब वापस आएंगे , अब बस यही हाथ रह
गया था .

और फिर वो एक दिन आता है. वो सोफे पर लेटा ठंडी
हवा का आनंद ले रहा था .

वो शाम की दिया-
बाती कर रही थी . वो देख रही थी कि वो सोफे पर
लेटा है. इतने में फोन की घंटी बजी , उसने लपक के
फोन उठाया .

उस तरफ बेटा था.

बेटा अपनी शादी
की जानकारी देता है और बताता है कि अब वह
परदेस में ही रहेगा. उसने बेटे से बैंक के शून्य के बारे में
क्या करना यह पूछा.

अब चूंकि विदेश के शून्य की
तुलना में उसके शून्य बेटे के लिये शून्य हैं इसलिए उसने
पिता को सलाह दी ” एक काम करिये , इन पैसों का
ट्रस्ट बनाकर वृद्धाश्रम को दे दीजिए और खुद भी
वहीं रहीये”. कुछ औपचारिक बातें करके बेटे ने फोन रख
दिया.

वो पुनः सोफे पर आ कर बैठ गया. उसकी भी दिया
बाती खत्म होने आई थी. उसने उसे आवाज़ दी ” चलो
आज फिर हाथों में हाथ ले के बातें करें ”

वो तुरंत बोली ” बस अभी आई ” उसे विश्वास नहीं
हुआ , चेहरा खुशी से चमक उठा , आंखें भर आईं , उसकी
आंखों से गिरने लगे और गाल भीग गए .

अचानक आंखों की चमक फीकी हो गई और वो
निस्तेज हो गया.

उसने शेष पूजा की और उसके पास आ कर बैठ गई, कहा ”
बोलो क्या बोल रहे थे ” पर उसने कुछ नहीं कहा .

उसने
उसके शरीर को छू कर देखा . शरीर बिल्कुल ठंडा पड़
गया था और वो एकटक उसे देख रहा था .

क्षण भर को वो शून्य हो गई, क्या करूं उसे समझ में नहीं
आया . लेकिन एक-दो मिनट में ही वो चैतन्य हो गई,
धीरे से उठी और पूजाघर में गई . एक अगरबत्ती जलाई
और ईश्वर को प्रणाम किया और फिर से सोफे पे आकर
बैठ गई.

उसका ठंडा हाथ हाथों में लिया और बोली ” चलो
कहां घूमने जाना है और क्या बातें करनी हैं तम्हे ”
बोलो !! ऐसा कहते हुए उसकी आँखें भर आईं. वो एकटक
उसे देखती रही , आंखों से अश्रुधारा बह निकली .
उसका सिर उसके कंधों पर गिर गया. ठंडी हवा का
धीमा झोंका अभी भी चल रहा था …………….

यही जिंदगी है।


Share On Whatsapp